15वें वित्त आयोग की अंतिम किस्त नहीं मिली, गांवों में नाली-सड़क और लाइट के काम ठप
Jharkhand Panchayat Fund: झारखंड को केंद्र से करारा झटका लगा। राज्य को 700 करोड़ रुपये नहीं मिले। यह राशि 15वें वित्त आयोग की थी। पंचायतों के विकास के लिए यह फंड था। यह अंतिम किस्त के तौर पर आनी थी। प्रशासनिक देरी के कारण पैसा अटक गया। अब यह भारी भरकम राशि लैप्स हो गई। इससे राज्य भर की पंचायतें बेबस हो गईं। ग्रामीण विकास की रफ्तार पूरी तरह थम गई।
Jharkhand Panchayat Fund: यूसी सर्टिफिकेट नहीं भेजने से फंसा मामला
विभाग को पिछले दिसंबर में फंड मिला था। इसका उपयोगिता प्रमाण पत्र मार्च तक भेजना था। समय पर यूसी सर्टिफिकेट केंद्र को नहीं भेजा गया। साथ ही ग्रांट ट्रांसफर सर्टिफिकेट भी नहीं गया। इसी तकनीकी खामी से केंद्र ने राशि रोक दी। इसके बाद राज्य सरकार ने लगातार पत्राचार किया। विशेष परिस्थिति में फंड जारी करने की गुहार लगाई। विभागीय मंत्री और अधिकारियों ने कई प्रयास किए। लेकिन समय सीमा पूरी होने पर राहत नहीं मिली।
Jharkhand Panchayat Fund: पांच वर्षों में मिलने थे 6585 करोड़ रुपये
15वें वित्त आयोग का कार्यकाल 2021 से 2026 तक था। इसके तहत राज्य को 6585 करोड़ मिलने थे। यह राशि पांच वर्षों के लिए निर्धारित थी। हर वित्तीय वर्ष में दो किस्तें मिलती थीं। अंतिम दो वर्षों में 2700 करोड़ मिलने थे। मगर विभाग केवल 2000 करोड़ ही जुटा पाया। इस तरह 700 करोड़ का बड़ा नुकसान हुआ। पंचायती राज विभाग सचिव मनोज कुमार ने स्थिति बताई। सचिव मनोज कुमार ने कहा, विभाग ने मांग की। लेकिन केंद्र ने अंतिम किस्त जारी नहीं की।
गांवों में पेयजल, नाली और स्ट्रीट लाइट के काम ठप
वित्त आयोग की इस राशि से गांव संवरने थे। गांवों में पक्की नालियों का निर्माण होना था। शुद्ध पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था की जानी थी। स्वच्छता अभियान और जल निकासी के काम रुके। छोटी सड़कों की मरम्मत का काम ठप पड़ा। गलियों में स्ट्रीट लाइट लगाने का काम अटका। फंड के अभाव में सभी योजनाएं अधूरी हैं। ग्रामीण लगातार नए काम की मांग कर रहे। लेकिन पंचायतों के पास अब पैसा नहीं बचा।
पंचायत प्रतिनिधियों में भारी नाराजगी और मायूसी
गांवों में विकास कार्य रुकने से लोग खफा हैं। जनप्रतिनिधियों को जनता के सवालों का सामना करना पड़ता। मुखिया और पंचायत समिति सदस्य काफी परेशान हैं। ग्रामीणों की शिकायतों का हल नहीं निकल पा रहा। कई महत्वपूर्ण योजनाएं केवल कागजों तक सीमित रहीं। इससे ग्रामीण इलाकों में भारी निराशा देखने को मिली। प्रतिनिधियों का कहना है कि वे क्या जवाब दें। फंड न होने से गांवों का विकास रुक गया।
अब 16वें वित्त आयोग से ही जगेगी नई उम्मीद
अब 15वें वित्त आयोग की अवधि पूरी हो चुकी। केंद्र में अब 16वां वित्त आयोग आ चुका। ऐसे में पुराना 700 करोड़ अब नहीं मिलेगा। आगामी विकास योजनाओं के लिए नई व्यवस्था बनेगी। 16वें वित्त आयोग से ही फंड की उम्मीद है। विभाग अब आगे के आवंटन की तैयारी में जुटा। ताकि भविष्य में ऐसी प्रशासनिक चूक न हो सके। ग्रामीण विकास को गति देने के नए प्रयास होंगे। पंचायतों को मजबूत करने की योजना फिर बनेगी।
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